Posts

Showing posts with the label hindu

Sunita Williams on life lessons she got up above the world.

Image
Sunita Williams on life lessons she got from up above the world so high.  Travelling space has changed my perspective on life. When you look at Earth from space as 'one planet', you realize how petty human grievances or differences are," astronaut Sunita Williams said. My father is from India, my mother is from Slovenia. So naturally I'm looking for both places that I can call home, and that's your first goal," she said. But later, "this initial 'feeling of finding home' gradually changes into a sense of oneness with the Earth," Honestly, I thought, why should anyone fight over anything? I'm married. I have a husband. We fight. So I understand how arguments happen; but it really comes down to this, why is this happening, and when you look at the world from that perspective, everything seems so petty," Williams said. This is a very valuable and unique interview with Sunita Williams. The title is also very apt. The kind of ...

Swami Vivekanand on Hindu Muslim. with marathi translate.

Image
इंग्रजी लेख व मराठी भाषांतर संदर्भ पुस्तक स्वामी विवेकानंद चरित्र. SWAMI VIVEKANANDA says : Uniting the Hindus and muslims is a need of hour. philosophy, which teaches the oneness of all. One June 10,1898, he wrote to a Moslem gentleman at Nainital. The Hindus may get the credit for arriving at Advaitism earlier than other races, they being an older race than either the Hebrew or the Arab; yet practical Advaitism, which looks upon and behaves towards all mankind as one's own soul, is yet to be developed among the Hindus universally. On the other hand, our experience is that if ever the followers of any religion approach to this equality in an appreciable degree on the plane of practical work-a-day life--it may be quite unconscious generally of the deeper meaning and the underlying principle of such conduct, which the Hindus as a rule so clearly perceive -it is those of Islam and Islam alone. Therefore we are firmly persuaded that without the help of practical Islam, the...

The Change. बदलाव. बदल करा. Religions. हिंदी मराठी english write up.

Image
● परिवर्तन ही एकमात्र स्थाई चीज़ है। ईसाइयों ने बाइबल से अवैज्ञानिक अवधारणाओं को निकाल फेंका।  हिंदू समाज ने  मानवता के लिए मनुस्मृति की भेदभावपूर्ण बातों को बदल दिया। अब मुसलमानों की बारी है कि वे शांतिपूर्ण विश्व के लिए कुफ्र के खिलाफ जिहाद छोड़ दें। ● बदल ही एकमेव स्थिर गोष्ट आहे. ख्रिश्चनांनी बायबलमधील अवैज्ञानिक संकल्पना फेकून दिल्या.  हिंदूंनी मानवतेसाठी मनुस्मृतीच्या भेदभाव करणाऱ्या गोष्टी बदलल्या. आता शांततापूर्ण जगासाठी कुफ्रविरुद्ध जिहाद सोडून देण्याची पाळी मुस्लिमांची आहे. ● Change is the only constant thing. Christians threw away ascientific concepts from bible.  Hindus changed manusmruti's discriminating narratives for humanity.   Now it's Muslims' turn to abandon jihad against kufr for peaceful world. ■दुनिया का इस्लामीकरण कभी नहीं होने वाला है। अगर आपको लगता है कि ऐसा होगा, तो आप मूर्खों के स्वर्ग में हैं। सभी धार्मिक अतिक्रमणों को रोकें, जियो और जीने दो की नीति को अपनाएँ और दुनिया को शांति और समृद्धि की ओर ले जाएँ। ■Islamization of the worl...

जे कृष्णामूर्ती यांचा व्यावहारिक सल्ला j krusnamurti preaches

Image
जिद्दू यांनी खूप व्यावहारिक आणि छान मार्ग सांगितला. उपनिषदां मध्ये देखील असाच छान आणि व्यावहारिक मार्ग दिला आहे.  आपल्याला वाटतं हिंदुत्वज्ञान अध्यात्मिकता हे सगळे एकांगी आहे; पण तसे नाहीये. म्हणून हे वाचा. आधुनिक संत जे. कृष्णमूर्तीजी हे अधिक व्यावहारिक ऋषी होते. ते म्हणतात की अन्न, पैसा आणि सेक्सची गरज या नैसर्गिक इच्छा समस्या नाहीत. त्या जीवनाचा भाग आहेत; परंतु या गोष्टींची अतिरेक किंवा लोभ किंवा वासना ही समस्या आहे. ती तुमच्यासाठी आणि समाजासाठी दुःख निर्माण करते. या अतिरेकी लोभामुळे आजचा समाज अशांत आहे. म्हणून आपण योगाचा मार्ग अवलंबूया आणि सर्वांना आनंद देण्याच्या अंतिम ध्येयासाठी स्वतःला आणि आपल्या समाजाला शुद्ध करूया. जय गुरुदेव. A modern saint J krushnamurti ji was more practical sage. He says natural urges viz. need of food, money and sex are not a problem. They are part of life; but too much want or greed or lust of these things is the problem. It creates unhappiness to you and also the society. Today's society is on unrest due to these excessive greed. So let us follow th...

कैसे मिलेगा अंतिम सुख यह बता रहे है उपनिषद

Image
https://youtu.be/nbEtMYzRG_E?si=PLO3AwnUh06nBmw9     उपनिषद में 🕉️कार का महत्व बहुत है; इसलिये इस व्हिडिओ के अंतिम भाग में मैं आपके साथ कुछ ओंकार साधना कर रहा हुं ।  *धन संपत्ती कामवासना से बढकर ' ज्ञान ' है - जो अंतिम, ड्युरेबल व सर्वोच्च सुख देगा ।*  धनसंपत्ती इ. से भी सुख मिलता है; लेकिन वो जादा ड्युरेबल नही होता । इसीलिए दोनो का भी अनुसंधान करना चाहिए । कृपया Like, share, comment & subscribe करना ना भूलें । 🙏

Humanity 26 Almighty of 3 major religions is same.

Image
🎊 Almighty is one entity named differently. Look how ?  ■ All Religion thoughts about Him will be quoted here now viz. Bible, Quoran, Bhagvad Geeta. ● Gods of different religions are the same super power or call Him Almighty. You can see what they say about the Almighty. ✝️ ● Holy Bible - Psalm 24 :  The earth and everything that exists belongs to God. All those living in the world belong to God. 🕉 ● Upanishad - Ishavasya Upanishad - verse 1 : This world is the home to the Lord Isha and everything that dwells is his property.  Geeta - Lord Krishna says He created this world. ☪️ ● Holy Quoran  fusaliyat 2.29 : It is He who created for you all of that which is on the earth. Then He directed Himself to the heaven and made them seven heavens, and He is Knowing of all things. He is Allah. ■ All of the most important preaches of 3 strong religions say the same thing about Almighty.   They name Him differently like - God, Ishvar Allah. ☆ If He is the same rest ...

उपनिषद ज्ञान भाग ~ १५ Fear of death ?

Image
● उपनिषद ज्ञान भाग १५ इसोपनिषद श्लोक १५  हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्‌ ।  तत्त्वं पूषन् अपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये । १५॥  ○ हिरण्मय चमक-दमकवाले ढकने से सत्य का मुख ढका हुआ है ।  हे पूषन्‌ ! --अयनो पुष्टि अर्थात्‌ पोषण कर्ता सूर्यदेव; मैं सत्य- धर्म को देखना चाहता हूं इसलिए उस हीरण्मय पात्र का, या ढक्कन का आवरण  हटा दे, पर्दे को उठा दे ॥१५॥ ■ यहां पर हम चिन्मय स्वामी के हिसाब से अर्थ बताएंगे । स्वामी जी कहते हैं कि; इस 15 वे श्लोक में एक ऋषीवर / एक मुनिवर अपने आप मृत्यु के द्वार पर खड़ा पातें है और फिर कुछ चीजों का सोच विचार करते है और इसी कारण से सूर्य देव से कुछ मांगते भी है । वह कहते हैं;  हे सूर्य देव अब मेरी अंतिम घड़ी आ गई है । और मैं सत्य धर्म को देखना चाहता हूं । जब तू अपने इस प्रकाश को फैला कर रखेगा तो मुझे यह भौतिक सृष्टि ही दिखाई देगी । फिर मैं उस सच को  उस परम् ब्रह्म को देख नहीं पाऊंगा । तुम्हारी सुनहरे रंग की आभा मेरे लिए एक पर्दा हो जाएगा । प्रकाश होकर भी पर्दा हो जाएगा । इसलिए हे रवीदेव आप के यह जो सहस्त्र रश्मि / कीरण है उ...

उपनिषद ज्ञान भाग ~ १२ Upanishada endorse Science and Spiritualism.

Image
उपनिषद ज्ञान भाग ~ १२ इशावास्य उपनिषद श्लोक १० और ११ - अन्यदेवाहुर्विद्ययाऽन्यदाहुरविद्यया ।   इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ।।१०॥  विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह ।   अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते ।। ११।।  शब्दार्थ : विद्या से अन्य ही कुछ, ओर अविद्या से अन्य ही कुछ फल होता है । धीर लोगों ने विद्या और अविद्याको जो व्याख्या की है  उससे ऐसा ही सुनते आये हैं ॥१०॥   विद्या तथा अविद्या --इन दोनों को जो एक साथ जानते हैं  वे अविद्या अर्थात्‌ भौतिक-विज्ञान ( science )  से मुत्यु लाने वाले प्रवाहो को तर जाते है और विद्या अर्थात्‌ अध्यात्म-ज्ञान से अमृतः को चखते है ।११।।  भावार्थ : हमने पिछले श्लोक में देखा था के केवल भौतिक या केवल आध्यात्मिक इसमें से एक को पकड़ के रहोगे तो एकांगी हो जाओगे... तो नष्ट हो जाओगे । यह बात क्यों कैसे सच है यह १० और ११ वें श्लोक में मुनीवर बता रहे हैं । कहते हैं कि जो science है मतलब फिजिकल scienses हैं उनका कोई एक फल / benefit होता है । और जो स्पिरिचुअल थॉट्स है उनका एक अलग स...

उपनिषद ज्ञान भाग ~ १० Upanishada wisdom for all.

Image
उपनिषद ज्ञान भाग ~ १० इशोपनिषद श्लोक ८ ^  ☆ थोड़ा बचा हुआ विवरण बता रहा हूं :  ■ विष्णु सहस्त्रनाम के छठे श्लोक में अज्ञात नाम के ऋषि मुनि कहते हैं कि; वह विश्वकर्मा है - उसके कर्म से ही यह पूरा विश्व प्रकट हुआ है , निर्मित हुआ है ।  ● और फिर हमारे ज्ञानेश्वर माऊली उनकी किताब अमृतानुभव में कहते है की; वही शिव तत्व है जिसे हम आत्मतत्व कहते है; वही पलट कर शक्ति के रूप में अपनी लीला / माया दिखता है । और तब ही यह संपूर्ण प्रकृति का विकास होता है ।  ● इसीलिए विष्णु सहस्त्रनाम के पहले श्लोक में उसे विश्व, विष्णु मतलब : ऑल परवेडिंग व पूरा यूनिवर्स कहा है । ■ और कहते हैं यह सृष्टि की निर्मिती, उसका भरण पोषण और उसका विनाश मतलब आदि मध्य अंत ये जो सब तीनों बातें हैं ; जिन्हें करने वाले हैं ब्रह्मा विष्णु और महेश हैं; उन सबका मिलकर जो कार्य है वह इस परब्रह्म का ही तो है । ¤《 वैसे तो वह निर्गुण निराकार होने के कारण कुछ करता नहीं है पर मानते हैं कि वो करता है; ताकि हमें अहंकार ना हो । विरुद्ध बातें एक साथ समझना थोड़ा मुश्किल तो है; लेकिन बहुत गहरी सोच करते जाओगे ...

उपनिषद ज्ञान भाग ५ Upanishad wisdom.

Image
उपनिषद ग्यान ५ :  ■ प्रियजन को मेरा हार्दीक नमस्कार | 🙏  निष्काम कर्म करने के लिए दो युक्तियां बताई गई है । इसमें एक है कि दूसरे श्लोक में जो बोला था - " जो भी है वह उसीका तो है, मेरा है ही नहीं । " यह बात सोच कर निष्काम हो जाएंगे । जब करने वाला, कराने वाला और फल देने या न देने वाला वही तो है; तो मैं काहे को चिंता करूं ? मेरा कुछ है ही नहीं.. इसलिए फल से भी मैं बंधा नहीं हूं । यह एक तरीका है ।  दूसरा तरीका है कि जो भी मैंने किया है हर एक चीज उसको समर्पित कर देना । यदि मैं खाता हूं तो पहले उसे नैवेद्य दिखाना - समर्पण करना । और यदि मैं सक्सेसफुल हो जाता हूं यशस्वी हो जाता हूं तो वह भी उसी के कारण है तो उसी को अर्पित है । हर एक चीज उसको अर्पण करना ।  यह कर्म फलों को त्याग करने की युक्तियां हैं । वैसे ही कर्म फल को त्यागना आसान बात नहीं होगी । □ असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसावृताः \  ता स्ते प्रत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः \\३ जो अपनी आत्मा का हनन करते हैं वे लोग मरने के बाद अंधकार से आवृत " असूर्य "लोक स्थान पर में पहुंच जाते हैं । जो लोग गलत काम करते ...

उपनिषद ज्ञान भाग ४ । upanishad wisdom for happiness.

📃 उपनिषद ज्ञान भाग ४ : ईशावास्य उपनिषद -  कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छत. समाः ।  एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कमं लिप्यते नरे ॥२॥) ।  सरल अर्थ है - हर मनुष्य को कर्म करते हुए 100 साल जीने की आकांक्षा करनी चाहिए । इसके अलावा दूसरा कोई मार्ग नहीं है । और ऐसा करेंगे तो कर्म का लेप नहीं होगा ।  卐 पहली पंक्ति में बहुत बातें आती हैं ।  ● एक - काम करो कर्म करते रहो । ● दूसरी -100 साल तक / दीर्घकाल जियो और कर्म करते रहो ।  ● तीसरी यदि आपको दीर्घकाल कर्म करते हुए जीना है तो स्वस्थ जीवन की जरूरत है ।  ■ पहले पंक्ति को सम अप करेंगे : स्वस्थ रहो, दीर्घकाल जियो और कर्म करते हुए जियो । 卐 दूसरे पंक्ति मे यह प्यार से बोला है; कि यह आपको मैंडेटरी है / कंपलसरी है । लेकिन यह कंपल्शन प्यार से होता है यदि आप आराम करते बैठो तो कोई आकर आपको मारने वाला तो है नहीं । ● युवाओं के लिए जबरदस्त प्रेरणा दी है । जीवन का उद्देश्य ही दे दिया । work is worship. काम से जब हम बोअर हो जाते हैं, थक जाते हैं तो मनोरंजन की तो जरूरत है । वह करना भी चाहिए लेकिन वोही करते रहेंगे या उसकी मात...