वर्षा ऋतु चर्या. how should we behave and eat in monsoon season.
वर्षा ऋतु चर्या भाइयों और बहनों अब वर्षा ऋतु की बेला आन खड़ी है । इच्छा करते है कि अच्छी खासी बारिश हो और धरती सुजलाम सुफलाम हो । इस ऋतु में कैसी चर्या होनी चाहिए - इस बातका मार्गदर्शन आचार्र्योने बहुत पहले ही आयुर्वेद ग्रंथो में कर के रखा है । वर्षा ऋतु में दो तीन बातें हो जाती है जल अम्ल स्वभावी बन जाती है - इस कारण अग्नि यानी पाचन शक्ति कम हो जाती है । इसीलिये हमे चाहिये कि भोजन हल्का और सुपाच्य हो । जो चीजे गुरु है यानी मिठाई, तलेली चीजे, फास्ट फूड - जंक फूड इनके सेवन से दूर ही रहे । जल के अमल स्वभाव होने के कारण और दूषित होने के कारण पानी उबाल कर पिये । भूख अच्छे से लगे इसलिये सोंठ जीरा जैसे पदार्थोंसे युक्त सूप का प्रयोग करे । ये सुप सब्जी का हो या मोंग का भी हो सकता है । हमे अपने आप को बाहर जाते वक्त भीगे ना इस बात की व्यवस्था रखनी चाहिए । छाता अक्सर साथ रखे । भीगते है तो तुरंत अपने बदन; विशेष कर के बाल सूखा लेने चहिये । बाल में पानी रहता है तो खांसी सर्दी होने की सम्भावना ज्यादा रहती है । भीगते है तो सबसे ज्यादा उपयुक्त वनस्पति है तुलसी के पत्ते । आप भीगे ना भीग...