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मानव-समाज व विश्व बंधुता

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🚩 ' सर्वं खलु इदं ब्रह्म. ' अर्थात : हे सर्व काही परब्रम्ह आहे. ' हे विश्वचि माझे घर ऐसी जयाची मती स्थिर  किंबहुना चराचर आपणची झाला. ' हे एकदा समजले की मग ' मानवतेची महागाथा ' उमजायला वेळ लागत नाही व ' मानवता ' विषयावर ' ततो न विजीगुप्सते ' अर्थात : या विषयाची घृणा देखील वाटत नाही.  प्रश्न राहिला तो असा की जे आक्रमण करतात त्यांच्या बद्दल काय करायचे ? स्वतःला व हिंदु धर्माला कसे टिकवायचे ?  तर त्यावर असे आहे की,  ' विनाशय च दुष्कृतां ' अर्थात : दुष्टांचे निर्दालन करावे. 🕉️ 🙏

उपनिषद ग्यान भाग ~ ९ Upanishad wisdom 9

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उपनिषद ज्ञान भाग ~ ९ ■ इस विषय का वीडियो मेरे यूट्यूब चैनल पर देखना ना भूले क्योंकि उस वीडियो को देखकर इस विषय का बहुत आनंद और उत्साह आपको मिलेगा । स॒पर्यगाच्छक्रमकायमव्रणमस्नाविरम् शुद्धमपापविद्धम्‌ । कविर्मनिषी परिभूः स्वथंभूर्याथातथ्यतोऽर्थान्व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः ।। ८॥  इशोपनिषद । ■ इस श्लोक में परब्रम्ह का संपूर्ण वर्णन किया है । अर्थ : ●  वह ( परब्रम्ह ) सब जगह रहता है । वह शुद्धता / purity की चरम-सीमा है । वह तेजस्वी और चमकदार है । इस रूप का ज्ञान पाकर शांत बैठकर ध्यान मे उसे महसूस करके भरपूर आनंद की अनुभूति होती है ।  ● उसको body नहीं, body नही तो जख्म कहां ? नस-नाडी कहां ?   It's above bodily elements . ● वह शुद्ध है = pure है । वह “पापरहित' है क्यों की वह कभी गलत काम कर ही नहीं सकता । ● वह " कवि " है = वेद काव्य का निर्माण करता है ।  वह " मनीषी " है  = हमारे मन का वही मालिक है स्वामी है ।  ● वह सब जगह मौजूद है  और वह " स्वयंभू " है मतलब कोई उसे पैदा नहीं करता ।  ● जो भी हमारे सारे व्यवहार है; उनका कंट्रोल वही करता है ...