विचार बहुत सी चीजों को बदल देते हैं, इसलिए हमें अपने विचारों पर काम करने की आवश्यकता है।

विचार बहुत सी चीजों को बदल देते हैं, इसलिए हमें अपने विचारों पर काम करने की आवश्यकता है।

1 व्यक्ति का जीवनः

सुविचार से अच्छे लक्ष्य प्रकट होते हैं और उनके प्रभाव से प्रेरित होकर लोग जीवन में सफलता, सुख और संतुष्टि प्राप्त करते हैं। दुष्ट लोग भी आजकल सफल हुए प्रतीत होते हैं, लेकिन उनके कार्य उन्हें लगातार चिंतित करते हैं। वह एक बहुत ही सफल व्यक्ति था जिसे प्रतिस्पर्धी गैंगस्टर ने मार दिया था। दूसरा और भी सफल रहा, वह एक नेता बन गया, लेकिन जब वह घर से बाहर निकलता, तो उसे एहसास हुआ कि डर की छाया है । उसका खुले आम बाहर निकलना भी नही होता था । इनमेसे कुछ लोग ईडी से डरते हैं, कुछ पुलिस से । एक सामान्य व्यक्ति इनसे बहुत अधिक खुशहाल जीवन जीता है।

2. देश के जीवन में विचारः

हिटलर एक देश को आत्मसम्मान के साथ जीने के लिए ले गया, लेकिन बाद में उसकी सोच फिसल गई और सब तबाह हो गया। जर्मनी को ठीक होने में समय लगा, लेकिन घाव अभी तक ठीक नहीं हुए हैं।

जीवन में धर्मः

अ.☪︎ कई मुस्लिम विचारकों का यह कहना है कि भारत और पाकिस्तान जैसे कई देशों में मदरसे जिहादी शिक्षा दे रहे हैं, जिसके कारण बढ़ता आतंकवाद आधी दुनिया में अशांति पैदा कर रहा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मुसलमानों के साथ-साथ गैर-मुसलमान भी पीड़ित हैं। वे भय गरीबी और निराशा में जी रहे हैं।

ब. 卐 भारत में हिंदुओं के लिए धर्म की रक्षा की जानी चाहिए। लेकिन हम दूसरे छोर पर नहीं जाना चाहीये ।हमें ऊपर की तरह मुसलमानों के साथ बातचीत करना चाहिए । कोई समुह नफरत नहीं करना है । ना की गृहयुद्ध। इससे कुछ नहीं निकलेगा। संगठन, जागरूकता, मुस्लिम समुदाय के साथ बातचीत, कानूनी कार्रवाई यही सही तरीके हैं। हिंदुओं को इसी सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

4.अच्छी सोचवाले ग्रुप्स:

इसके विपरीत, जापान, जो अतीत में लगातार चीन पर हमला करने और उस पर अत्याचार करने में लगा हुआ था, अब एक व्यक्तिगत स्तर से लेकर पूरे देश तक सभी स्तरों पर सर्वोत्तम लक्ष्यों का पीछा करके एक शांतिपूर्ण (इकेगाई) और समृद्ध देश बन रहा है। वही बात न्यूजीलैंड फिनलैंड की है। यह दुनिया के सबसे प्यारे, सबसे स्वच्छ और सबसे खुशहाल देश बन गया है।

  विभिन्न स्तरों पर ऐसे विचार बनाते या तोड़ते हैं।

अगर हम एक बेहतर दुनिया का निर्माण करना चाहते हैं, तो व्यक्तिगत स्तर से लेकर वैश्विक स्तर तक सभी स्तरों पर सोच में सुधार करने की तत्काल आवश्यकता है। मानवता इसके लिए एक अच्छा आधार है। क्या हम ऐसा करने के लिए तय्यार हैं?

आपका, डॉ. प्रसाद फाटक पुणे 2

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